Tuesday, June 16, 2020

कौन हैं वो लोग जिन्होंने सुशांत सिंह राजपूत को आत्महत्या करने के लिये मजबूर किया / -: डॉ सीमा सिंह

      आज के समय में डिप्रेशन सबसे बड़ी बीमारी बन चुकी है !
अधिकांश मामलों में डिप्रेशन में चले गए व्यक्ति को इसका अंदाजा भी नहीं होता कि वह किसी बीमारी से गुजर रहा है !सुशांत सिंह राजपूत भी डिप्रेशन के शिकार थे ,उनका इलाज भी चल रहा था लेकिन उनके जैसा कुशाग्र बुद्धि वाला, प्रतिभाशाली, मेहनती और सफल व्यक्ति को आखिर किस बात का दुःख था!
   
                             सुशांत सिंह राजपूत 
               
                सुशांत सिंह राजपूत एक बेहतरीन छात्र रहे हैं, सदा ही पढ़ाई में अव्वल रहे हैं, उन्होंने 12वीं क्लास के बाद इंजीनियरिंग की 11 परीक्षाएं उत्तीर्ण की !ऑल इंडिया एंट्रैस इक्ज़ाम में 7वीं रैंक हासिल की थी, दिल्ली में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे ,वहीं से वह डांस, फिर ऐक्टिंग के रास्ते आज बॉलीवुड में  सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ रहे थे! 
           इतना ब्रिलियंट इंसान जिसने जो चाहा वह हासिल किया, आज उनके पास दौलत और शोहरत सब कुछ था लेकिन फिर ऐसा क्या हुआ कि यह सितारा जो अपने घर में टेलीस्कोप रखता था और वहीं से रात में आकाशगंगा को देखने वाला, खुद ही डिप्रेशन में चला गया !
 
   
                                 सुशांत सिंह राजपूत 
              
                    सुशांत सिंह राजपूत ने पटना से निकलकर दिल्ली  होते हुए मुंबई में अपने टैलेंट को साबित किया, वहाँ बिना किसी गॉडफादर के एक से बढ़कर एक बेहतरीन फिल्मों में काम किया ! वह सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ते जा रहे थे, लेकिन शायद बॉलीवुड के कुछ ठेकेदारों को यह अच्छा नहीं लग रहा था, इसीलिये उन लोगों ने अपनी गुटबाजी के चलते इस होनहार और हुनरमंद कलाकार को इंडस्ट्री से बाहर का रास्ता दिखाने की प्लानिंग कर ली! 
                 डायरेक्टर शेखर कपूर ने बिना उन लोगों का नाम लिये ये ट्वीट किया कि " सुशांत मुझे पता था जिस दर्द से आप गुजर रहे थे, मैं उन लोगों की कहानी जानता था जिनकी वजह से आप परेशान थे, आप मेरे कंधे पर सिर रखकर रोते थे............काश कि मैं पिछले 6 महीने आपके साथ होता.. जो तुम्हारे साथ हुआ वो उनका कर्म था तुम्हारा नहीं! "

      अभिनेत्री कंगना रनौत ने खुलकर अपने वीडियो में कहा है कि बॉलीवुड में बाहर के लोगों को प्रतिभावान होने के बावजूद नीचा दिखाया जाता है, उन्हें वो सम्मान नहीं दिया जाता जिसके वो हकदार होते हैं... कंगना ने तो सुशांत की आत्महत्या को प्लान्ड मर्डर कहा है...! 
         इसके बाद विवेक ओबरॉय ने भी एक ओपेन लेटर लिख कर यह जिक्र किया कि काश वह पहले मिलने आते और वह उनसे अपना अनुभव साझा कर पाते... यह भी यही संकेत कर रहा है कि विवेक ओबरॉय भी बॉलीवुड की गुटबाजी के शिकार रह चुके हैं! 
            अभिनेत्री  उर्मिला मातोंडकर और रवीना टंडन ने भी यह बोला है कि बॉलीवुड में सब कुछ ठीक नहीं है !  बॉलीवुड के ही कुछ और भी लोगों ने खुलकर अपने विचार रखे हैं जो यह साबित करता है कि छोटे शहरों से आए कलाकारों को बॉलीवुड में अच्छी फिल्में करने के बावजूद किनारे करने की कोशिश की जाती है! 

  
                                  KRK tweet
   
        कमाल खान का फरवरी 2020 का एक ट्वीट सामने आया है जिसमें लिखा है कि सुशांत को बैन कर दिया गया है ,बड़े प्रोडक्शन हाउसेज जैसे कि करन जौहर का धर्मा प्रोडक्शन, यशराज फिल्म्स, टी सीरीज, बालाजी सलमान खान फिल्म्स, साजिद नाडियाडवाला आदि ने सुशांत सिंह राजपूत को बैन कर दिया था...! साथ ही पिछले छह महीनों मे सुशांत को सात फिल्मों से निकाल दिया गया था... अब सुशांत केवल वेबसीरीज और टीवी सीरियल में ही काम कर सकते थे....! ये सब बातें कितनी सच हैं यह तो जाँच के बाद ही सामने आएगा किंतु यदि यह सब सही साबित हुआ तो आखिर सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के लिये क्या इन लोगों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा! 
         डिप्रेशन में आत्महत्या के खयाल आना स्वाभाविक है लेकिन किसी भी तरह से अपने आप को इस समस्या से निकालना ही होता है ! समस्या कितनी भी बड़ी हो उसका कोई न कोई हल जरूर होता है...! आत्महत्या किसी भी समस्या का हल नहीं है! सुशांत जैसा मजबूत इंसान इतना कमजो़र नहीं हो सकता कि वह अपनी ज़िंदगी को ऐसे ही समाप्त कर ले.... अभी तो बहुत ऊँचाइयों तक जाना था.... ! लेकिन निष्ठुर बॉलीवुड गैंग्स या फिर कुछ और कारण था जिसने सुशांत जैसे सपने देखने वाले जिंदादिल इंसान को इतना मजबूर कर दिया कि उसने जिंदगी के आगे घुटने टेक दिये! 
          
               
              सुशांत की मौत ने सभी के सामने कुछ सवाल तो खड़े किये हैं...... कि जिंदगी  का अकेलापन डिप्रेशन को बढ़ावा देता है... डिप्रेशन में चल रहे इंसान को किसी के साथ की और साथी की बहुत जरूरत होती है ! अकेले में इंसान  दुख और निराशा के पलों में हार जाता है और मौत को गले लगा लेता है.....!  इसलिये डिप्रेशन के रोगी को कभी अकेला नहीं छोड़ना चाहिये! 
                   -- डॉ सीमा सिंह 
                     (Dr Seema Singh) 
                  
                

Wednesday, June 3, 2020

क्या इंसान जानवर जितना भी संवेदनशील नहीं रहा... : By Dr Seema Singh

       मनुष्य को इस धरती पर सबसे अधिक बुद्धिमान प्राणी माना गया है ! ऐसा माना जाता है कि मनुष्य का जीवन मिलना बड़े सौभाग्य की बात है, लोग कहते हैं कि पूर्व जन्म में  जरूर कोई पुण्य कर्म किये होंगे तभी तो मानव तन मिला है !
         मनुष्य होकर भी मनुष्यता न दिखाएं तो मनुष्य होने का क्या लाभ ! इंसान का दिमाग सर्वश्रेष्ठ होता है तभी तो वह अन्य सभी जीवित प्राणियों को नियंत्रित करने के प्रयास में लगा रहता है! छोटे से बड़े सभी जीव- जन्तु मनुष्य के वश में हैं ! मानव हैं तो संवेदना भी जरूर होगी, यदि आप संवेदनशील नहीं हैं तो आपके मनुष्य होने पर संदेह है !

 
        
         
         क्या किसी इंसान को बेजुबानों के साथ क्रूरता पूर्ण काम करना चाहिये ? केरल में एक हथिनी (female elephant)  के साथ किसी ने बहुत ही घिनौना और क्रूर कृत्य किया है, शायद मज़े के लिये किया हो !
 
  
                          गर्भवती फीमेल हाथी 
         किसी ने अनन्नास में पटाखे रखकर उस फीमेल हाथी को खिला दिया, उस मूक पशु के अंदर पटाखे जल रहे थे ! सोचिये क्या हाल हो रहा होगा उस जीव का जो जीवित है और उसके अंदर पटाखे दग रहे हैं !
         वह फीमेल हाथी गाँव से भागती हुई सीधे पानी के अंदर चली गई, उसने किसी को भी कोई हानि नहीं पहुँचाई ! वह वहीं पानी में ही खड़ी रही जब तक कि उसकी मृत्यु नहीं हो गई! जब उसका पोस्टमार्टम किया गया तब पता चला कि वह तो प्रेगनेंट थी!  


        उस फीमेल हाथी के साथ उसका अजन्मा बच्चा भी मर गया और शायद मानवता भी ! पूरी मानव प्रजाति पर तो सवाल नहीं उठाएंगे लेकिन वो व्यक्ति जिसने इस कुकृत्य को अंजाम दिया है, क्या उसे इंसान कहना उचित होगा !
           ऐसे बेरहम, संवेदनहीन इंसानों से तो वो जानवर लाख गुना बेहतर हैं, जो इंसान का टैग नहीं लगाते लेकिन इंसानी गुणों से युक्त होते हैं  ! संवेदनशील  जानवर, संवेदनहीन मनुष्य से अच्छे होते हैं! 
                    --डॉ सीमा सिंह 
                  (Dr Seema Singh )
          

 

Wednesday, May 13, 2020

मजदूरों की मजबूरी की कहानी --Blog by Dr Seema Singh

  •     By Dr Seema Singh 
          गाँव में रोटी की दिक्कत थी,तो भाग कर दूर शहर में चले गए! वहीं कुछ काम धंधा ढ़ूढ़ लिया और कमाने खाने लगे !ज्यादा जरूरतें नहीं होतीं बस रोटी मिल जाए, कुछ कपड़े -लत्ते और कहीं भी डेरा जमा कर गुजर बसर कर लेते हैं! 


फोटो 

              ज्यादा बड़े सपने नहीं देखते ये लोग, बस पेट भर जाए, बच्चों के साथ कहीं भी सिर छुपा के जी लेते हैं! थोड़ा बहुत पैसा जो बचा लिया अपना पेट काट कर, वो गाँव में माँ-बाप के पास भेज देते हैं ! ऐसे ही रोज़ कमाया और खाया चलता रहता है! कभी -कभार गाँव जाने का मौका मिला तो जाकर सबसे मिल आते हैं! फिर  शहर लौटकर अपने काम में लग जाते हैं ,बस यही चक्र चलता रहता है! 


फोटो 

               लेकिन इस बार इस कोरोना वायरस ने तो सारी गणित ही बिगाड़ दी इन लोगों की! लॉकडाउन हुआ तो जैसे इनका जीवन ही लॉक हो गया, काम छूट गया तो रोजी -रोटी पर जैसे डाका ही पड़ गया हो! अब क्या खाएँ और कहाँ रहें! सरकार कहती रही कि जहाँ हो वहीँ रहो पर घर से दूर बिना पैसे के एक-एक दिन काटना युगों के बराबर लगता है! 
फोटो -सोशल मीडिया 

                    सरकार की तरफ से मिलने वाला राशन और भोजन सभी की भूख नहीं मिटा पाता और रोज़ खाने के लिये किसी सरकारी मुलाजिम के आगे हाथ फैलाना भी तो अच्छा नहीं लगता! 
गरीब हैं तो क्या हुआ कुछ स्वाभिमान और खुद्दारी भी तो होती है! इसलिये ये बार-बार का बढ़ता लॉकडाउन बेचैन करने लगा! बस यही समझ में आता है कि अब अपने गाँव वापस जाना है, चाहे जितनी  भी मुश्किल आए !

फोटो -प्रवासी मजदूरों का पलायन

          अब तो बस गाँव जा कर ही दम लेंगे, चाहे डेढ़ हजार किलोमीटर की लम्बी दूरी पैदल ही क्यों न तय करनी पड़े! जो कुछ एक दो झोले थे, उन्हें उठाया और चल दिये, छोटा बच्चा है या गर्भवती पत्नी है तो क्या हुआ है तो है! सभी को पैदल चलना ही होगा! 

फोटो -प्रवासी मजदूरों का पैदल ही पलायन 

                लोगों की परेशानी, उनके घर जाने की तीव्र इच्छा को देखते हुए सरकार ने विशेष श्रमिक रेलगाडी़ चला दी और श्रमिकों को उनके गाँव वापस भेजना शुरू कर दिया! जिन्हें ट्रेन मिल गई, वो तो बहुत खुश थे क्योंकि वे बहुत दिनों की तकलीफ झेलने के बाद घर जा रहे थे !स्टेशन पर उतरने के बाद पूरा जिला प्रशासन और चिकित्सकों की टीम उनका इंतज़ार करती हुई मिली! उन्हें पानी, मास्क और लंच पैकेट भी सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए थे! 


फोटो -श्रमिक ट्रेन से लौटते लोग

            वहीं दूसरी तरफ बहुत से लोग अभी भी पैदल यात्रा करते हुए मिले! इसकी वजह क्या हो सकती है जब ट्रेन चल रही हैं तो ट्रेन से ही जाना चाहिये! हो सकता है कि वे लोग सरकार की बात मान ही न रहे हों, लेकिन पैदल चलना किसी का शौक तो नहीं हो सकता! जरूर कुछ तकनीकी समस्या होगी, जैसे कि ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन हो रहा हो ट्रेन के लिये जो कि उन मजदूरों को करना ही नहीं आता !या फिर कुछ और समस्या हो सकती है! 


फोटो -सोशल मीडिया 

         कहीं छोटी सी गाड़ी खुद ही बनाकर, उसमें पत्नी और बच्चे को बिठाकर हाथों से खींचते हुए पैदल ही सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय किये जा रहे हैं! कहीं रेलवे ट्रैक पर थक कर बैठ गए और सो गए, रात में मालगाड़ी कुचलते हुए चली गई! सोलह लोग जो कोरोना से बचे हुए थे लेकिन एक ट्रेन से मर गए! सभी कहानियाँ दुखद हैं लेकिन यही सच्चाई है! 

फोटो -रेलवे ट्रैक पर मृत मजदूरों की बिखरी रोटियाँ 

               भारत की  बढ़ती हुई जनसंख्या और उसके साथ अब तक न खत्म हुई गरीबी इस समय कोरोना से भी अधिक चिंता का विषय बन गए हैं! देश के समक्ष चुनौती है कि कोरोना वायरस से पहले लड़े या फिर गरीबी से! इसीलिये सरकार ने दोनों समस्याओं के साथ एक ही समय लड़ना प्रारंभ कर दिया है! अपने देश को और यहाँ के लोगों को आत्मनिर्भर बनाने पर सरकार जोर दे रही है! अब लोकल के लिये वोकल बनना है! 

     --डॉ सीमा सिंह 

Wednesday, April 29, 2020

वो स्टार नहीं एक अभिनेता था जो सबको रुला गया ! --Dr Seema Singh

इरफ़ान ख़ान
     
        आज कैफ़ी आज़मी जी का एक शेर बहुत याद आ रहा है, और माहौल में फिट भी हो रहा है! एक बेहतरीन अभिनेता के असमय जाने से चारों ओर वादियों में सन्नाटा है, माहौल ग़मग़ीन है बस रह-रह के यही आवाज़ आती है कि-
  " रहने को सदा दहर में आता नहीं कोई,
    तुम जैसे गए, ऐसे भी जाता नहीं कोई! "
                                       -कैफ़ी आज़मी

        ये बड़ी-बड़ी जादुई आँखों वाला आम जन का अभिनेता आज सभी आम और ख़ास  की आँखों में आँसू बहा गया !कहते हैं कि किसी व्यक्ति का जीवन इस बात से ही सफल या असफल माना जाता है कि उसकी मृत्यु पर कितने लोगों की आँखों में आँसू आए या कितने लोग उसकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए !                                                                             इरफ़ान ख़ान की अंतिम विदाई में तो ज्यादा लोग जा नहीं सकते थे क्योंकि इस समय हमारा देश और पूरा विश्व एक बहुत बड़ी आपदा से जंग लड़ रहा है जिसके कारण लॉकडाउन है और सोशल डिस्टैंसिंग भी  जरूरी है !इसलिये किसी की भी अंतिम यात्रा में सिर्फ 20 लोग ही जा सकते हैं!
लेकिन आज बहुत से लोगों की आँखों में आँसू जरूर बहे हैं चाहे वह आम हो या खास हो, तो इस आधार पर इरफ़ान ख़ान का जीवन  पूर्णरूपेण सफल रहा!

अभिनेता इरफ़ान ख़ान

               इरफ़ान ख़ान न तो स्टार थे, और न ही हीरो वो सिर्फ एक मंझे हुए अभिनेता थे जिसने टीवी सीरियल, बॉलीवुड और हॉलीवुड सभी जगह अपनी अमिट छाप छोड़ी है! मैं यह  दावे के साथ कह सकती हूँ कि यदि कोई व्यक्ति जो इरफ़ान खान को नहीं भी जानता हो और उनकी एक फिल्म देख ले, वो उनके अभिनय कौशल की प्रशंसा किये बिना नहीं रह सकता!
                यही कारण है कि एक सामान्य से रंग रूप वाले अभिनेता  द्वारा निभाया गया प्रत्येक रोल अमर हो गया ! अपने द्वारा अभिनीत भूमिकाओं की तरह ही यह अभिनेता भी लोगों के दिलों में अमर हो गया है! इरफ़ान ख़ान की मृत्यु की खबर सुनकर सबके मन में यही भाव आया होगा कि अभी तो और बहुत कुछ आना बाकी था, अभी तो और न जाने कितने बेहतरीन रोल देखना बाकी था लेकिन नियति के आगे सब असहाय हैं!
            कैसा दुखद संयोग था कि अपनी मृत्यु के चार दिन पहले उनकी माता का निधन हुआ ,वो लॉकडाउन और अपनी बीमारी के चलते अपनी माँ की अंतिम यात्रा में शामिल नहीं हो पाए और न ही उनके दर्शन कर पाए ! उनकी आखिरी फिल्म 'इंग्लिश मीडियम' के प्रमोशन में  वो पहुँच नहीं पाए थे, तब उन्होंने जो ऑडियो जारी किया, उसके शब्द सुनकर ऐसा लगता है जैसे उन्हें अपनी मृत्यु करीब दिखाई दे रही थी! उनका यह कहना कि "मैं आप के साथ हूँ भी और नहीं भी हूँ... .............जैसा होगा आप लोगों को उसकी इत्तला कर दी जाएगी" !देखिये न  आज क्या इत्तला की गई ...कि अब इरफ़ान ख़ान हम सब के बीच नहीं रहे!
                बहुत कम लोग ऐसे होते हैं कि उनसे आप कभी भी न मिले हों, आपका कोई व्यक्तिगत रिश्ता भी  न हो और न ही उनसे किसी प्रकार की जान पहचान हो, आप उन्हें सिर्फ उनके काम के माध्यम से जानते हों फिर भी उनकी मृत्यु आपको रोने पर मजबूर कर दे! इरफ़ान ख़ान एक ऐसी ही शख्सियत थे! ऐसे चमकते सितारों को ईश्वर भी अपने पास जल्दी बुला लेता है! ईश्वर से प्रार्थना है कि वह उस महान आत्मा को अपने चरणों में स्थान दें!
                                --डॉ सीमा सिंह 
           
             

Tuesday, April 28, 2020

बिहार सरकार कोटा में फँसे बिहार के छात्रों की गुहार क्यों नहीं सुन रही है :- By Dr Seema Singh

     
कोटा में फँसे बिहार के छात्र
                 

          कोटा में कई राज्यों के छात्र रहते हैं और अपनी पढ़ाई करते हैं लेकिन इस कोविड-19 के दौरान लॉकडाउन घोषित हो जाने के कारण सभी शैक्षणिक संस्थानों को बंद कर दिया गया है! छात्रों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है! सबसे बड़ी बात तो ये है कि ऐसे संकट के समय प्रत्येक व्यक्ति अपने परिवार के साथ रहना चाहता है, उसे मानसिक सपोर्ट मिलता है जो कि इस समय की कोरोना से लड़ी जा रही जंग में बहुत जरूरी है!

 फोटो -सोशल मीडिया 

          ये छात्र उम्र के उस दौर में हैं जहाँ अकेले इस तरह से परिवार से दूर रहना उन्हें डिप्रेशन में भी ला सकता है! ये बच्चे अभी इतने बड़े नहीं हैं कि ऐसी समस्याओं के साथ ज्यादा दिन अकेले लड़ सकें! बच्चे डर रहे हैं, डर-डर कर जीना किसी को भी बीमार बना सकता है! यहाँ ये परेशान हैं और दूसरी तरफ इनके अभिभावक परेशान हो रहे हैं!
         यही सब देखते हुए सबसे पहले उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बसें भेजकर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के सभी  बच्चों को वापस बुला लिया! इसके बाद दूसरे कई राज्यों जैसे मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़ आदि की सरकारों ने भी अपने राज्य के छात्रों को वापस बुलाने का निर्णय ले लिया!

फोटो -सोशल मीडिया

                 बिहार की नितीश कुमार सरकार ने साफ मना कर दिया कि वे अपने राज्य के छात्रों को कोटा से वापस नहीं बुलाएँगे ,इस पर बिहार के छात्रों को अत्यंत दुख हुआ और वे वहीं अंशन पर बैठ गए! बहुत से छात्रों ने वीडियो के माध्यम से बिहार सरकार से गुहार लगाई लेकिन नितीश कुमार सिर्फ लॉकडाउन का हवाला देते रहे!
           जब उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अपने छात्रों को कोटा से वापस बुलाने के लिये बसें भेजी थी तब भी नितीश कुमार ने विरोध जताया था ! बिहार में इस मुद्दे पर राजनीति भी गरमाई लेकिन नितीश  कुमार के कान पर जूँ नहीं रेंगी!
बिहार में रह रहे छात्रों ने भी विरोध प्रदर्शन किया कि कोटा में  फँसे छात्रों को वापस बुलाया जाए लेकिन नितीश कुमार जी उन बच्चों की परेशानियों को समझने में नाकाम रहे!
            यदि इन बच्चों को कल को खाना न मिले या उनके साथ कुछ भी बुरा हो जाए तो कौन जिम्मेदार होगा, क्या तब बिहार की सरकार हाथ खड़े कर लेगी और बस ये कहकर कि लॉकडाउन था, अपना पल्ला झाड़ लेगी !
            जिस प्रकार से भारत सरकार ने विदेशों में रह रहे अपने छात्रों को वापस बुलाया, कई राज्य सरकारों ने कोटा से अपने छात्रों को बुलाया, ठीक उसी तरह से बिहार सरकार की भी जिम्मेदारी बनती है कि वो अपने छात्रों को वापस बुलाए! ये छात्र भारत का भविष्य हैं, ये आने वाले कल की धरोहर हैं, इनका साथ दें!
                        --डॉ सीमा सिंह 

Wednesday, March 25, 2020

आखिर कोरोना वायरस कैसे पहुँचा इटली में और कैसे हुआ इतना बेकाबू : By Dr Seema Singh

                  इटली एक बहुत खूबसूरत देश है लेकिन पिछले एक महीने से इस देश में कोरोना वायरस के चलते जो हालात बने हुए हैं वो किसी से छिपे नहीं हैं !
कोरोना के मरीजों का इलाज चल रहा है 
             
            पूरे देश में लॉकडाउन है, लोग अपने घरों में बंद हैं! कोरोना के मरीजों की संख्या हर रोज़ तीव्र गति से बढ़ रही है! पिछले एक हफ्ते से इटली में मौत का आँकडा औसत रूप से प्रतिदिन 700 के आस-पास है!
             कोरोना का केंद्र तो चीन का वुहान था फिर ये इटली कैसे पहुँचा, इसका जवाब तो यही हो सकता है कि किसी चीनी पर्यटक के द्वारा पहुँच गया होगा ! चीन से बहुत अधिक संख्या में लोग घूमने फिरने के लिये इटली जाते हैं! लेकिन जब चीन में मनुष्य से मनुष्य में फैलनी वाली इस बीमारी से रोज ही लोग मर रहे थे तो उस समय में किसी भी  चीनी नागरिक का इटली जाना कहाँ तक उचित माना जाए!

खूबसूरत इटली

          खबरों के मुताबिक देखा जाए तो चीनी नागरिकों के साथ शुरुआत में जब इटली में कुछ दूरी बनाई जा रही थी तभी वहाँ के एक मेयर ने ये कहा कि हमें इन लोगों से ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिये नहीं तो हम पर नस्लवाद का आरोप लगेगा! उसी दौरान एक चीनी पर्यटक सड़क पर प्लेकार्ड लेकर खड़ी हो गई ,उस प्लेकार्ड में लिखा था कि मैं वायरस नहीं हूँ, मैं एक इन्सान हूँ, मुझे भी गले से लगाइये! (I am not a virus, I am a human being so please hug me)
                   इसके बाद तो दो दिन के अंदर करीब पाँच हजार लोगों ने उस चीनी पर्यटक को गले लगाया, कुछ ने तो उनके मास्क भी  हटा दिये! जब ये सब हो रहा था इटली में, तब चीन में सभी लोग बहुत खुश हो रहे थे! कहीं ये चीन के द्वारा की गई कोई साजिश तो नहीं थी या फिर इसे इटली के लोगों की असावधानी भर कहेंगे!
                 इसके बाद इटली में शुरुआती दौर में कुछ मरीजों में एक दो लक्षण आए भी तो उसे गंभीरता से नहीं लिया गया! मरीजों को साधारण निमोनिया या बुखार की दवा देकर घर भेेज दिया गया लेकिन जब दो मरीजों की मौत हो गई तब कोरोना  वायरस की टेस्टिंग शुरू की गई! फिर तो एकदम से कई केस पॉजिटिव पाए गए! लेकिन तब भी वहाँ के कुछ लोग पिक्निक मनाने में व्यस्त थे!

                    इटली में इन्हीं सब लापरवाहियों या प्रारम्भ में कम गंभीरता के चलते केसों की संख्या भी बहुत तेजी से बढ़ी और मौत का आँकड़ा हर रोज़ बढ़ता चला गया! जबकि दुनिया जानती है  कि इटली की स्वास्थ्य सुविधाएं विश्व में नंबर दो पर आती हैं! इटली में इतनी अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं व बेहतरीन डॉक्टर होने के बावजूद कोविड 19 पर काबू पाना बहुत ही मुश्किल हो चुका है!

कोरोना पीड़ित को जिन्दा रखने की कोशिश 

                      इटली में हर रोज़ लाशों का अंबार लगता है, जिन्हें दफनाने के लिये सेना की मदद ली जाती है! सेना के ट्रक उन्हें बाहर  दूसरे स्थानों पर ले जाते हैं क्योंकि अब दफनाने का नियत स्थान भी तो नहीं बचा !इटली के हालात सुनकर किसकी आँखें नम नहीं हो जाएंगी !ऐसे मुश्किल दौर में सबसे बड़ी जिम्मेदारी देश के मुखिया की होती है! इटली के प्रधानमंत्री ग्विसिपे कोंटे ने कोरोना पर विजय पाने के सभी प्रयास कर लिये लेकिन उसे नियंत्रित नहीं कर पाए! ऐसे में उनकी बेबसी को देखा जा सकता है जब उन्होंने ये कहा कि हमारी तरफ से हर तरह के प्रयास किये जा चुके हैं, अब सबकुछ ऊपरलाले के हाथ में है!
           
लाशों को ले जाते हुए ट्रक 
               अब इटली जैसी ही स्थिति स्पेन में शुरू हो गई है! कल इटली में 683 मौतें हुई थीं वहीं स्पेन में भी 656 मौतें हुईं! इटली में अब तक कुल  7503 मौतें हो चुकी हैं ,वहीं स्पेन में भी 3647 मौतें हो चुकी हैं! अमेरिका में भी कोरोना के केसों की संख्या 68203 हो चुकी है जिसमें से 1000 से अधिक लोगों की मृत्यु हो चुकी है! भारत में भी कोरोना के मरीजों की संख्या 600 के पार पहुँच चुकी है और 14 लोगों की मौत हो चुकी है!
 
                 भारत में 21 दिनों का संपूर्ण देश में लॉकडाउन है! यदि भारतीय नागरिकों ने आत्मसंयम और आत्मअनुशासन दिखा दिया तो 130 करोड़ का ये सबसे बड़ा लोकतंत्र कोरोना पर विजय पाने में सफल हो सकता है! हम सबको इटली की गलतियों से सीखकर खुद को बचाना है, देश को बचाना है! इटली ,स्पेन, अमेरिका आदि सभी देशों के लिये हम सिर्फ प्रार्थना कर सकते हैं कि सभी देश अब जल्द ही इस विपदा से बाहर निकल आएं!
                                     -- डॉ सीमा सिंह 

Friday, March 20, 2020

गैरजिम्मेदार और लापरवाह नागरिकों ने देश को कोरोना के तीसरे चरण की ओर धक्का दे दिया है! --By Dr Seema Singh

                    विश्व के प्रत्येक कोने में जीवन की जंग चल रही है ,ऐसा लग रहा है कि दुनिया तीसरा विश्व युद्ध लड़ रही है !सबकी जबान पर एक ही बात है कि जान है तो जहान है, जान बची रही तो फिर से सब ठीक कर लेंगे! अर्थव्यवस्था डूबेगी कोई बात नहीं, उससे उबर जाएंगे लेकिन अपने लोगों को मरने नहीं दे सकते! केंद्र सरकार युद्ध स्तर पर जुटी हुई है ताकि कोरोना वायरस को द्वितीय चरण से आगे बढ़ने से रोका जा सके! राज्य सरकारें हर पल अपने राज्यवासियों की सुरक्षा के लिये नए -नए कदम उठा रही हैं!
            हमारे देश के सभी स्वास्थ्य कर्मी चाहे डॉक्टर हों, नर्स हों, फार्मासिस्ट हों या अन्य सहायक कर्मचारी हों, दिन रात अपनी सेवाएं दे रहे हैं! इस नाजुक समय में युद्घ के असली सिपाही तो ये स्वास्थ्य कर्मी ही हैं! मीडिया भी पूरी तरह से मुस्तैद है, हर जरूरी जानकारी प्रतिपल जनता तक पहुँचा रही है! सभी सफाई कर्मचारी भी अपनी परवाह किये बिना अपनी सेवाएं दिये जा रहे हैं! वो सभी नागरिक जो कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिये अपने आप को क्वारंटाइन में रख रहे हैं और दूसरों को घर में बैठने के लिये प्रेरित कर रहे हैं,ऐसे सभी लोग  बधाई के पात्र हैं!
एक डॉक्टर का निवेदन
                   इस सबके उलट कुछ लोग ऐसे भी हैं जो बेपरवाह होकर हर जगह घूमते रहते हैं, कुछ लोग धरने पर बैठे हैं जैसे दिल्ली में शाहीनबाग और लखनऊ में घंटाघर पर महिलाएं बैठी हैं !उनसे उठने को कहा जाता है तो अजीब से तर्क देती हैं कि उन्हें कोरोना नहीं होगा या फिर कहती हैं कि हमें मरने से डर नहीं लगता लेकिन सच्चाई को और मामले की गंभीरता को न तो वो समझ पा रही हैं और न ही उनको उकसाने वाले लोग वहाँ जाकर समझा रहे हैं! 
           आज एक उच्च वर्ग की पढ़ी लिखी, सुशिक्षित, बॉलीवुड सिंगर  कनिका कपूर ने जिस लापरवाही का परिचय दिया है उसकी जितनी भी निंदा की जाए वह कम ही होगी! 
कनिका कपूर 
ये मैडम 9 मार्च को लंदन से मुंबई आईं, उसके बाद अगले दिन ये लखनऊ पहुँचीं, लखनऊ में ये तीन पार्टी करती हैं, शॉपिंग करने जाती हैं, कानपुर में अपने मामा के घर भी जाती हैं वहाँ भी दो दिन रुकती हैं और इन सभी मौकों पर सबके साथ सेल्फी लेती हैं! इनकी पार्टियों में सांसद, मंत्री और बड़े -बड़े नेता शामिल होते हैं यहाँ तक कि उत्तर प्रदेश के वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री भी सपरिवार सम्मिलित होते हैं! आज 20 मार्च को कनिका कपूर कोरोना वायरस के लिये पॉजिटिव पाई गईं!                                
                     अब ये अंदाजा लगा पाना भी मुश्किल प्रतीत हो रहा है कि कनिका कपूर कितने लोगों को कोरोना का संक्रमण दे चुकी हैं! क्या इनकी ये जिम्मेदारी नहीं बनती थी कि ये लंदन से लौटने के बाद सेल्फ क्वारंटाइन में चली जातीं लेकिन इन्होंने लापरवाही की जो कि आज अपराध की श्रेणी में आ चुका है! इन्होंने न जाने कितने लोगों की जिन्दगियाँ खतरे में डाल दी हैं! शासन और प्रशासन का काम बढ़ा दिया, सरकार का करोड़ो रुपये का खर्च बढ़ा दिया क्योंकि अब लखनऊ, कानपुर और गौतमबुद्ध नगर को सैनिटाइज किया जाएगा! अच्छा ही हुआ कि लखनऊ के डी एम ने कनिका कपूर पर धारा 188,269 और 270 के तहत एफ आई आर दर्ज करवा दी है ताकि दूसरे गैर जिम्मेदार लोगों को कुछ सीख मिल सके! 
                          एक तरफ हमारी सरकार कोरोना को फैलने से रोकने के लिये सभी संभव प्रयास कर रही है वहीं दूसरी ओर मंत्री और सांसद पार्टी कर रहे हैं! इस नाजुक समय में जब चारों तरफ सोशल डिस्टैंसिंग की बात हो रही है तब ये नेता और मंत्री सोशल गेदरिंग कर रहे हैं, क्या इनकी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती है कि ये अपने आचरण से समाज के समक्ष एक नजीर पेश करें! 
वसुंधरा राजे, कनिका कपूर सेल्फी लेते हुए 
                              ऐसे ही कुछ और भी  केस चर्चा में आए हैं जिन्होंने विदेेश से लौटने के बाद क्वारंटाइन का नियम नहीं माना और दो- चार दिन सबके बीच घूमते रहेे ,ये सभी केस पॉजिटिव पाए गए! 
लंदन से लौटा लड़का ,माँ के साथ 


           ये लड़का कोलकाता की एक सीनियर आई ए एस अधिकारी का बेटा है, ये लंदन से लौटने के बाद दो दिन ऐसे ही घूमता रहा और कोरोना पॉजिटिव पाया गया! इसने न जाने कितने लोगों को कोरोना वायरस का संक्रमण दे दिया होगा! ऐसा ही एक केस बंगलौर में भी  पाया गया, जो कि जर्मनी से लौटा था और उसकी माँ ने उसे आइसोलेशन में भेजने के बजाय अपने साथ गेस्टहाउस में रखा! वह  रेलवे की अधिकारी थी लेकिन उसकी इस हरकत के बाद उसे सस्पेंड कर दिया गया है! ऐसे ही केस अहमदाबाद और राजस्थान में भी  सामने आए हैं जो कि विदेश से लौटकर सबके बीच घूमते रहे और कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं! 
                      इन सब लोगों ने अब तक न जाने कितने लोगों के बीच कोरोना वायरस पहुँचा दिया होगा! मोदी जी की कोशिशों को नाकाम करने के लिये ये लापरवाह, गैर जिम्मेदार नागरिक यहाँ वहाँ विचरण कर चुके हैं! क्या हम लोग  तृतीय चरण में जाने से बच सकते हैं? नहीं बच पाएंगे क्योंकि इस तरह के मूर्ख नागरिकों की कमी नहीं है इस देश में! फिर भी उम्मीद करूँगी कि हमारा देश चीन और इटली जैसे कठिन, दर्दनाक समय को न देखे! अभी भी सब लोग सुधर जाएं तो शायद हमारा भारत इस जंग को जीतने में कामयाब हो जाए! 
                                   --डॉ सीमा सिंह