Sunday, March 8, 2020

महिला दिवस कितना कारगर रहा उन गरीबों और शोषितों के लिये......

 मदर टेरेसा : प्रत्येक महिला को गौरवान्वित करती हैं! 

                   महिला हूँ इसीलिये खास हूँ आज के दिन क्योंकि आज का दिन महिलाओं के नाम समर्पित किया गया है! क्या प्रत्येक महिला को आज उसके घर में मान सम्मान मिला होगा ? नहीं, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है! यह महिला दिवस जानने वाले अधिकांश  लोग भी  इस सोशल मीडिया की देन हैं! मेरी माँ, मेरी दादी,  और मेरी नानी के जीवन में मैंने कभी महिला दिवस नहीं देखा और ऐसी ही करोड़ों महिलाएं हैं जिनके जीवन में कभी महिला दिवस नहीं आया! 
                      क्या एक दिन महिला दिवस मना लेने से महिलाओं को सम्मान मिल जाता है, या उनके प्रति धारणा बदल जाती है ! प्रत्येक वर्ष महिला दिवस आता है और चला जाता है, कुछ लोगों को सम्मान भी मिल जाता है!  उन महिलाओं का क्या जिन्हें न तो वर्ष भर सम्मान मिलता है और न ही महिला दिवस के दिन जबकि वो अपना पूरा जीवन अपने परिवार के लिये बिना किसी दिखावे के समर्पित कर देती हैं! 
                      यह बात सत्य है कि महिला दिवस  के दिन बहुत सी महिलाओं की उपलब्धियों का सम्मान किया जाता है जो कि अन्य महिलाओं के लिये भी  प्रेरणास्पद होता है!  क्या सच  में  ये एक दिन का महिला दिवस आधी आबादी के साथ पूर्ण न्याय  करता है ! मुझे लगता है कि 80 % महिलाओं के साथ बिल्कुल भी न्याय नहीं करता है! वह महिलाएं, महिला दिवस के दिन भी रोजमर्रा की जिन्दगी में पारिवारिक दायित्वों के बोझ से जूझती हैं, उनसे कोई दो मीठे बोल बोलने वाला भी नहीं होता है! 
                  महिलाओं के बारे में लोगों की धारणा जब तक नहीं बदलती तब तक किसी भी दिवस को मनाने का कोई फायदा नहीं है! जिस तरह से महिलाओं के साथ अपराध होते हैं, वे घरेलू हिंसा और दहेज हत्या  का शिकार होती हैं, बलात्कार का शिकार होती हैं ऐसे में तीन सौ पैसठ दिन में एक दिन का महिला दिवस बेमानी लगता है! महिला दिवस के दिन क्या कोई भी पुरुष यह संकल्प लेता है कि वह आज के बाद प्रत्येक महिला को सम्मान की दृष्टि से देखेगा, उसकी इज्ज़त करेगा! 
               महिलाएं सिर्फ एक दिन विशेष सम्मान की हकदार नहीं बल्कि हमेशा ही उन्हें सम्मानित किया जाना चाहिये! नारी ईश्वर की सर्वोत्तम रचना है, वह जननी है, यदि वह न हो तो जीवन की कल्पना करना भी नामुमकिन है! नारी का जीवन आसान नहीं होता है, प्रकृति ने नारी को बहुत बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है, बहुत सारा दर्द सहन करने की क्षमता दी है और बिना उफ किये दर्द में भी मुस्कुराने की कला दी है!  उसके भी  ऊपर परिवार और समाज में उसे ही दोयम दर्जा दे दिया गया! क्या  वास्तविकता में नारी को इंसाफ मिला है !
                       महिला दिवस को तभी कारगर माना जा सकता है जब उन्हें वास्तव में बराबरी का हक और सम्मान मिले, उनके साथ होने वाले अपराध खत्म हो जाएं और वो बिना किसी डर के इस समाज में सिर उठाकर जी सकें !उम्मीद करती हूँ कि थोड़ा ही सही परन्तु प्रत्येक महिला के जीवन में सकारात्मक बदलाव जरूर आएंगे! विश्व की प्रत्येक महिला को उसके महिला होने पर गर्व महसूस कराने वाले पल जरूर मिलने चाहिये !
                            --डॉ सीमा सिंह 

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