Friday, February 21, 2020

महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर ये भी जानिये कि शिव और शंकर में क्या अंतर है

      शिव का अर्थ -
                 शिव ही परमात्मा हैं और शिव का अर्थ है कल्याणकारी ! ऐसा माना जाता है कि परमात्मा शिव जन्म नहीं लेते क्यों कि वे तो स्वयं ही सबके माता-पिता हैं!
                 अधिकांश लोग शिव और शंकर को एक ही मानते हैं परन्तु वास्तविकता ये नहीं है! शिव और शंकर में भिन्नता है! जिसे हम शिवलिंग कहते हैं असल में वही शिव हैं! शिव और शंकर की प्रतिमाएँ अलग प्रकार की होती हैं!
शंकर की प्रतिमा शारीरिक आकार लिये होती है!
शिव की प्रतिमा 
   शिव का शरीर नहीं होता है, शिव तो सिर्फ एक ज्योति हैं!जबकि शंकर जी शरीर धारण करते हैं! शंकर को ही महादेव कहा जाता है! शिव को परमात्मा कहा जाता है लेकिन शंकर को परमात्मा नहीं कहा जा सकता! शंकर जी को शिव जी की रचना माना जाता है क्योंकि शिव ही रचयिता हैं!                
शंकर की प्रतिमा 
शंकर जी तो स्वयं शिव की आराधना करते हैं! ऐसी मान्यता है कि शिव मुक्तिधाम में वास करते हैं जबकि शंकर जी शंकरपुरी में निवास करते हैं !शिव जी विश्व का कल्याण करते हैं! मान्यताओं के मुताबिक सृष्टि के रचनाकार ब्रह्मा जी हैं, सृष्टि के पालनकर्ता विष्णु जी हैं और सृष्टि का विनाश शंकर जी के द्वारा किया जाता है! इन तीनों के भी रचयिता हैं शिव! 
          शिवरात्रि अर्थात परमात्मा शिव का अवतरण! परमात्मा शिव अवतरित होकर सभी आत्माओं में आध्यात्मिक जागृति उत्पन्न करते हैं!रात्रि वास्तव में अविवेक, पाप, तमोगुण की निशानी है, विषय -विकारों का अंधकार होता है तभी शिव जन्म लेते हैं, यही कारण है कि शिव दिन नहीं बल्कि शिवरात्रि कहा जाता है !                            
शिव के अवतरित होते ही प्रकाश सारे विश्व में फैल जाता है, अंधकार और विकारों का विनाश हो जाता है! विकार अर्थात काम, क्रोध, लोभ, मोह सभी का विनाश शिव ही तो करते हैं! 
शिव शान्ति देते हैं, शिव सुख देते हैं और शिव ही पवित्रता प्रदान करते हैं!                                                      
--डॉ सीमा सिंह 

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