Wednesday, April 29, 2020

वो स्टार नहीं एक अभिनेता था जो सबको रुला गया ! --Dr Seema Singh

इरफ़ान ख़ान
     
        आज कैफ़ी आज़मी जी का एक शेर बहुत याद आ रहा है, और माहौल में फिट भी हो रहा है! एक बेहतरीन अभिनेता के असमय जाने से चारों ओर वादियों में सन्नाटा है, माहौल ग़मग़ीन है बस रह-रह के यही आवाज़ आती है कि-
  " रहने को सदा दहर में आता नहीं कोई,
    तुम जैसे गए, ऐसे भी जाता नहीं कोई! "
                                       -कैफ़ी आज़मी

        ये बड़ी-बड़ी जादुई आँखों वाला आम जन का अभिनेता आज सभी आम और ख़ास  की आँखों में आँसू बहा गया !कहते हैं कि किसी व्यक्ति का जीवन इस बात से ही सफल या असफल माना जाता है कि उसकी मृत्यु पर कितने लोगों की आँखों में आँसू आए या कितने लोग उसकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए !                                                                             इरफ़ान ख़ान की अंतिम विदाई में तो ज्यादा लोग जा नहीं सकते थे क्योंकि इस समय हमारा देश और पूरा विश्व एक बहुत बड़ी आपदा से जंग लड़ रहा है जिसके कारण लॉकडाउन है और सोशल डिस्टैंसिंग भी  जरूरी है !इसलिये किसी की भी अंतिम यात्रा में सिर्फ 20 लोग ही जा सकते हैं!
लेकिन आज बहुत से लोगों की आँखों में आँसू जरूर बहे हैं चाहे वह आम हो या खास हो, तो इस आधार पर इरफ़ान ख़ान का जीवन  पूर्णरूपेण सफल रहा!

अभिनेता इरफ़ान ख़ान

               इरफ़ान ख़ान न तो स्टार थे, और न ही हीरो वो सिर्फ एक मंझे हुए अभिनेता थे जिसने टीवी सीरियल, बॉलीवुड और हॉलीवुड सभी जगह अपनी अमिट छाप छोड़ी है! मैं यह  दावे के साथ कह सकती हूँ कि यदि कोई व्यक्ति जो इरफ़ान खान को नहीं भी जानता हो और उनकी एक फिल्म देख ले, वो उनके अभिनय कौशल की प्रशंसा किये बिना नहीं रह सकता!
                यही कारण है कि एक सामान्य से रंग रूप वाले अभिनेता  द्वारा निभाया गया प्रत्येक रोल अमर हो गया ! अपने द्वारा अभिनीत भूमिकाओं की तरह ही यह अभिनेता भी लोगों के दिलों में अमर हो गया है! इरफ़ान ख़ान की मृत्यु की खबर सुनकर सबके मन में यही भाव आया होगा कि अभी तो और बहुत कुछ आना बाकी था, अभी तो और न जाने कितने बेहतरीन रोल देखना बाकी था लेकिन नियति के आगे सब असहाय हैं!
            कैसा दुखद संयोग था कि अपनी मृत्यु के चार दिन पहले उनकी माता का निधन हुआ ,वो लॉकडाउन और अपनी बीमारी के चलते अपनी माँ की अंतिम यात्रा में शामिल नहीं हो पाए और न ही उनके दर्शन कर पाए ! उनकी आखिरी फिल्म 'इंग्लिश मीडियम' के प्रमोशन में  वो पहुँच नहीं पाए थे, तब उन्होंने जो ऑडियो जारी किया, उसके शब्द सुनकर ऐसा लगता है जैसे उन्हें अपनी मृत्यु करीब दिखाई दे रही थी! उनका यह कहना कि "मैं आप के साथ हूँ भी और नहीं भी हूँ... .............जैसा होगा आप लोगों को उसकी इत्तला कर दी जाएगी" !देखिये न  आज क्या इत्तला की गई ...कि अब इरफ़ान ख़ान हम सब के बीच नहीं रहे!
                बहुत कम लोग ऐसे होते हैं कि उनसे आप कभी भी न मिले हों, आपका कोई व्यक्तिगत रिश्ता भी  न हो और न ही उनसे किसी प्रकार की जान पहचान हो, आप उन्हें सिर्फ उनके काम के माध्यम से जानते हों फिर भी उनकी मृत्यु आपको रोने पर मजबूर कर दे! इरफ़ान ख़ान एक ऐसी ही शख्सियत थे! ऐसे चमकते सितारों को ईश्वर भी अपने पास जल्दी बुला लेता है! ईश्वर से प्रार्थना है कि वह उस महान आत्मा को अपने चरणों में स्थान दें!
                                --डॉ सीमा सिंह 
           
             

Tuesday, April 28, 2020

बिहार सरकार कोटा में फँसे बिहार के छात्रों की गुहार क्यों नहीं सुन रही है :- By Dr Seema Singh

     
कोटा में फँसे बिहार के छात्र
                 

          कोटा में कई राज्यों के छात्र रहते हैं और अपनी पढ़ाई करते हैं लेकिन इस कोविड-19 के दौरान लॉकडाउन घोषित हो जाने के कारण सभी शैक्षणिक संस्थानों को बंद कर दिया गया है! छात्रों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है! सबसे बड़ी बात तो ये है कि ऐसे संकट के समय प्रत्येक व्यक्ति अपने परिवार के साथ रहना चाहता है, उसे मानसिक सपोर्ट मिलता है जो कि इस समय की कोरोना से लड़ी जा रही जंग में बहुत जरूरी है!

 फोटो -सोशल मीडिया 

          ये छात्र उम्र के उस दौर में हैं जहाँ अकेले इस तरह से परिवार से दूर रहना उन्हें डिप्रेशन में भी ला सकता है! ये बच्चे अभी इतने बड़े नहीं हैं कि ऐसी समस्याओं के साथ ज्यादा दिन अकेले लड़ सकें! बच्चे डर रहे हैं, डर-डर कर जीना किसी को भी बीमार बना सकता है! यहाँ ये परेशान हैं और दूसरी तरफ इनके अभिभावक परेशान हो रहे हैं!
         यही सब देखते हुए सबसे पहले उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बसें भेजकर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के सभी  बच्चों को वापस बुला लिया! इसके बाद दूसरे कई राज्यों जैसे मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़ आदि की सरकारों ने भी अपने राज्य के छात्रों को वापस बुलाने का निर्णय ले लिया!

फोटो -सोशल मीडिया

                 बिहार की नितीश कुमार सरकार ने साफ मना कर दिया कि वे अपने राज्य के छात्रों को कोटा से वापस नहीं बुलाएँगे ,इस पर बिहार के छात्रों को अत्यंत दुख हुआ और वे वहीं अंशन पर बैठ गए! बहुत से छात्रों ने वीडियो के माध्यम से बिहार सरकार से गुहार लगाई लेकिन नितीश कुमार सिर्फ लॉकडाउन का हवाला देते रहे!
           जब उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अपने छात्रों को कोटा से वापस बुलाने के लिये बसें भेजी थी तब भी नितीश कुमार ने विरोध जताया था ! बिहार में इस मुद्दे पर राजनीति भी गरमाई लेकिन नितीश  कुमार के कान पर जूँ नहीं रेंगी!
बिहार में रह रहे छात्रों ने भी विरोध प्रदर्शन किया कि कोटा में  फँसे छात्रों को वापस बुलाया जाए लेकिन नितीश कुमार जी उन बच्चों की परेशानियों को समझने में नाकाम रहे!
            यदि इन बच्चों को कल को खाना न मिले या उनके साथ कुछ भी बुरा हो जाए तो कौन जिम्मेदार होगा, क्या तब बिहार की सरकार हाथ खड़े कर लेगी और बस ये कहकर कि लॉकडाउन था, अपना पल्ला झाड़ लेगी !
            जिस प्रकार से भारत सरकार ने विदेशों में रह रहे अपने छात्रों को वापस बुलाया, कई राज्य सरकारों ने कोटा से अपने छात्रों को बुलाया, ठीक उसी तरह से बिहार सरकार की भी जिम्मेदारी बनती है कि वो अपने छात्रों को वापस बुलाए! ये छात्र भारत का भविष्य हैं, ये आने वाले कल की धरोहर हैं, इनका साथ दें!
                        --डॉ सीमा सिंह