Friday, February 14, 2020

In the memory of martyrs of Pulwama attack


   पुलवामा हमले की बरसी -- आज ही के दिन एक वर्ष पहले पुलवामा में हमारी भारतीय सेना के 40 बहादुर वीरों  की शहादत हुई थी!  आतंकवादियों द्वारा भारतीय सेना के एक जत्थे पर किये गए अमानवीय हमले में 40 परिवारों का चिराग बुझ गया था! हमारे मुल्क का प्रत्येक  वाशिंदा जो अपने मुल्क से बेपनाह मोहब्बत करता है, उस दिन बहुत रोया था!
       मोहब्बत का दिन 14 फरवरी ही चुना था उन्होंने भी अपने वतन से मोहब्बत करते हुए अपनी जान लुटाने  को! 
        यह पूरा वतन उन शहीदों को सलाम करता है जिन्होंने हमारी हिफ़ाज़त में अपने प्राण न्यौछावर कर दिये! हम उनके परिवारों के कर्जदार हैं जिनके घर की एक मात्र रोशनी हमारे घरों को रोशन करने में बुझ गई! आज फिर से उस हमले की यादें ताजा़ हो गयीं और हमारी आँखें फिर से नम हो गईं !
                आपकी कुर्बानी हमारे दिलों में हमेशा  जिन्दा रहेगी  ! आप सभी वो कोहिनूर हैं  जो बनने की हसरत प्रत्येक  वीर बहादुर  की होती है.... ये देश आपका सदैव  कर्जदार रहेगा  !
                      उन 40 परिवारों  पर क्या गुजरती होगी ये तो जान पाना और समझ पाना किसी के बस की बात नहीं है लेकिन उनका थोड़ा सा दर्द बांटने की कोशिश जरूर की जा सकती है  ! हर घर की अलग कहानी है लेकिन हर कहानी में बेइंतहाँ दर्द  भरा हुआ है  ! जो शादीशुदा थे उनकी पत्नियाँ  सिर्फ  यादों के सहारे अपने जीवन  को काटेंगी  ,जब -जब अपने शहीद पति को याद करेंगी  तब-तब उनकी आँखें आँसुओं से भर जाएंगी  !
                जिन बच्चों के सिर से बाप का साया सदा के लिये  उठ गया, उनके दुख को बयाँ करने के लिये  शब्द नहीं हैं  ! वो माँ - बाप जो उम्मीद लगाए बैठे थे कि उनका बेटा उनके बुढ़ापे का सहारा बनेगा  ,आज उनकी चिता को आग देने वाला ही नहीं  रहा  ! प्रत्येक परिवार को इन सब दुखों के बावजूद अपने  शहीद सपूत पर गर्व है  !कई परिवार तो ऐसे भी  हैं जो अपना एक बेटा देश पर कुर्बान करने के बावजूद चाहते हैं कि काश उनका एक और बेटा होता जिसे वो भारत माँ  की सेवा में भेज पाते  !
                     धन्य हैं वे परिवार और वे माताएँ जो देश पर कुर्बान होने के लिये अपने कलेजे के टुकड़े को हँसते - हँसते रुख़सत कर देते हैं  !
                                       -डॉ सीमा सिंह 

No comments:

Post a Comment