आज 11 फरवरी 2020 को दिल्ली विधान सभा चुनाव परिणाम देखने के बाद ये प्रतीत होता है कि अब दिल्ली में केजरीवाल और उनकी पार्टी को हराना बहुत मुश्किल हो चुका है! बीजेपी और कांग्रेस की हार ने साबित कर दिया है कि जब तक आप ज़मीनी मुद्दों के प्रति संजीदगी से काम नहीं करेंगे तब तक जनता नकारती रहेगी!
कांग्रेस का तो 2015 की तरह फिर से सूपड़ा साफ हो गया और देश की सबसे पुरानी पार्टी शून्य सीट के साथ तीसरे नंबर पर काबिज है! ये हार बीजेपी के लिये भी शर्मनाक है क्योंकि दिल्ली में सभी सांसद उनके हैं, केंद्र सरकार उनकी है और वर्तमान में देश की सबसे बड़ी पार्टी महज सात सीटों पर सिमट गई!
बीजेपी तो इस बात को अच्छी तरह जानती है कि जनता सिर्फ विकास मॉडल पर वोट देती है क्योंकि 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर आने का एक मात्र कारण विकास की बात थी! आज की पढ़ी लिखी जनता हिन्दू-मुस्लिम, भारत -पाकिस्तान, धारा 370 ,शाहीन बाग, राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों पर वोट नहीं करती! जनता उसको वोट देगी जो बिजली सस्ती देगा, पानी मुफ्त देगा, जो शिक्षा की बात करेगा, स्वास्थ्य की बात करेगा, सड़क, सीसीटीवी कैमरे की बात करेगा...! सिर्फ इतना ही नहीं दिल्ली की महिलाओं को फ्री मेट्रो की सुविधा जिसने दी है उसको तो वो वोट करेंगी ही!
जनता फ्री के साथ तो हमेशा जाती है, साथ ही केजरीवाल से बेहतर कोई ऑप्शन भी तो नहीं था दिल्ली में!
यही जनता लोकसभा चुनावों में मोदी के पक्ष में वोट करती है लेकिन दिल्ली विधानसभा के चुनाव में दमदार मुख्यमंत्री चाहती है जिसका चेहरा न बीजेपी के पास है और न ही कांग्रेस के पास! सिर्फ एक ही ऑप्शन है दिल्ली के पास और वो हैं केजरीवाल!
कांग्रेस ने कोशिश भी नहीं की जीतने की, जिसका सीधा फायदा आम आदमी पार्टी को मिला और नुकसान बीजेपी को! यदि कांग्रेस कुछ बेहतर प्रदर्शन करती तो बीजेपी की सीटें जरूर बढ़ी होतीं और आम आदमी पार्टी की कुछ सीटें कम हुई होतीं! बीजेपी ने 2015 की 3 सीटों के मुकाबले सिर्फ 7 सीटें हासिल की, इस मामूली बढ़त को बढ़त नहीं कहेंगे! यदि बीजेपी 25 सीट तक भी हासिल करती तो माना जा सकता था कि थोड़ी बहुत टक्कर दे पाए हैं!
अब बीजेपी और कांग्रेस दोनों को ईमानदारी से अपना आंकलन करना होगा कि दिल्ली विधानसभा के अगले चुनाव में क्या वो अपना अस्तित्व बचा पाएंगी या इसी तरह दिल्ली की परिधि से बाहर होना है!
-डॉ सीमा सिंह
कांग्रेस का तो 2015 की तरह फिर से सूपड़ा साफ हो गया और देश की सबसे पुरानी पार्टी शून्य सीट के साथ तीसरे नंबर पर काबिज है! ये हार बीजेपी के लिये भी शर्मनाक है क्योंकि दिल्ली में सभी सांसद उनके हैं, केंद्र सरकार उनकी है और वर्तमान में देश की सबसे बड़ी पार्टी महज सात सीटों पर सिमट गई!
बीजेपी तो इस बात को अच्छी तरह जानती है कि जनता सिर्फ विकास मॉडल पर वोट देती है क्योंकि 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर आने का एक मात्र कारण विकास की बात थी! आज की पढ़ी लिखी जनता हिन्दू-मुस्लिम, भारत -पाकिस्तान, धारा 370 ,शाहीन बाग, राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों पर वोट नहीं करती! जनता उसको वोट देगी जो बिजली सस्ती देगा, पानी मुफ्त देगा, जो शिक्षा की बात करेगा, स्वास्थ्य की बात करेगा, सड़क, सीसीटीवी कैमरे की बात करेगा...! सिर्फ इतना ही नहीं दिल्ली की महिलाओं को फ्री मेट्रो की सुविधा जिसने दी है उसको तो वो वोट करेंगी ही!
जनता फ्री के साथ तो हमेशा जाती है, साथ ही केजरीवाल से बेहतर कोई ऑप्शन भी तो नहीं था दिल्ली में!
यही जनता लोकसभा चुनावों में मोदी के पक्ष में वोट करती है लेकिन दिल्ली विधानसभा के चुनाव में दमदार मुख्यमंत्री चाहती है जिसका चेहरा न बीजेपी के पास है और न ही कांग्रेस के पास! सिर्फ एक ही ऑप्शन है दिल्ली के पास और वो हैं केजरीवाल!
कांग्रेस ने कोशिश भी नहीं की जीतने की, जिसका सीधा फायदा आम आदमी पार्टी को मिला और नुकसान बीजेपी को! यदि कांग्रेस कुछ बेहतर प्रदर्शन करती तो बीजेपी की सीटें जरूर बढ़ी होतीं और आम आदमी पार्टी की कुछ सीटें कम हुई होतीं! बीजेपी ने 2015 की 3 सीटों के मुकाबले सिर्फ 7 सीटें हासिल की, इस मामूली बढ़त को बढ़त नहीं कहेंगे! यदि बीजेपी 25 सीट तक भी हासिल करती तो माना जा सकता था कि थोड़ी बहुत टक्कर दे पाए हैं!
अब बीजेपी और कांग्रेस दोनों को ईमानदारी से अपना आंकलन करना होगा कि दिल्ली विधानसभा के अगले चुनाव में क्या वो अपना अस्तित्व बचा पाएंगी या इसी तरह दिल्ली की परिधि से बाहर होना है!
-डॉ सीमा सिंह
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