Wednesday, February 12, 2020

Citizenship Amendment Act 2019 is necessary or could be postponed

    नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 को लागू करना कितना जरूरी है और कितना गैर जरूरी! ये तो भावनात्मक विश्लेषण का मुद्दा है किन्तु समझना और समझाना दोनों ही हठधर्मिता का शिकार हैं! ये बात पूर्णतया सत्य है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम के लागू होने से किसी भी  भारतीय की नागरिकता नहीं जाएगी, वो चाहे किसी भी धर्म का हो!
        भारतीय मुस्लिमों को जरा सा भी घबराने या डरने की आवश्यकता नहीं है! ये कानून तो धर्म के आधार पर सताए गए पाकिस्तानी, अफगानिस्तानी और बांग्लादेशी अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता देने के लिये है! वो भी  2014 तक जो लोग भारत में आ गए थे और यहाँ शरणार्थी के रूप में जीवन गुजार रहे थे!
          इस कानून का विरोध करने वाले दो तरह का मत रखते हैं, एक तो वो हैं जो यह कह रहे हैं कि इस कानून को वापस ले लो क्योंकि हमारे देश में पहले से ही बहुत अधिक जनसंख्या है,  दूसरे वो लोग हैं जो यह कह रहे हैं कि इसमें पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के मुस्लिमों को क्यों नहीं शामिल किया गया!  ये बात पूर्णतया सत्य है कि हमारे देश में पहले से ही बहुत अधिक जनसंख्या है, भौतिक संसाधनों पर अनावश्यक बोझ बढ़ाने से क्या फायदा! लेकिन जरा गौर से संवेदनशील होकर सोचिये तो देख पाएंगे कि ये अल्पसंख्यक लोग इस्लामिक देशों में धर्म के आधार पर प्रताणित किये गए हैं जिसके कारण वो भारत में शरणार्थी बनने को मजबूर हुए!
                        गांधी जी ने भी भारत-पाकिस्तान बंटवारे के समय इस बात का जिक्र किया था कि यदि अल्पसंख्यक भाई बन्धु वहाँ खुश न हों तो भारत में उन्हें आने दिया जाएगा! और आज इस नागरिकता संशोधन अधिनियम के माध्यम से गांधी जी का सपना ही तो पूर्ण किया गया है! रही बात इन तीनों देशों के मुस्लिमों को इस कानून में न शामिल करने की तो ये तो सभी को स्पष्ट है कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश इस्लामिक देश हैं और किसी इस्लामिक मुल्क में इस्लाम को मानने वाले के साथ धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होता है और न ही वह प्रताणित किया जाता है!
                         इतनी मामूली सी बातें सभी को समझ में आ जाती हैं तो फिर नागरिकता संशोधन अधिनियम का इतना अधिक विरोध क्यों किया जा रहा है!  जब किसी की नागरिकता खतरे में नहीं है तो फिर राष्ट्रीय सम्पत्ति की बर्बादी करना, सार्वजनिक रास्ते को दो महीने से रोके रखना किस संविधान में लिखा है! ये सिर्फ राजनीतिक पार्टियों तथा कुछ विशेष लोगों के द्वारा भ्रम फैलाकर हिन्दू-मुस्लिम विभाजक विचारधारा को पोषित करने व सरकार की खिलाफत करने की साजिश मात्र है!
                         नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोधी कहते हैं कि हम कागज नहीं दिखाएंगे, मैं उन लोगों से यह निवेदन पूर्वक कहना चाहती हूँ कि जब हम अन्य कामों के लिये समय- समय पर कुछ न कुछ कागज जरूर दिखाते हैं तो फिर नागरिकता के लिये क्यों नहीं! आधार कार्ड, पासपोर्ट, डी एल, राशन कार्ड, बिजली का बिल जैसे न जाने कितने कागज हर नागरिक के पास होते हैं तो फिर यह हठधर्मिता क्यों? और वैसे भी अभी एन आर सी तो आया नहीं है और आएगा  भी तो जो कागज मांगे जाएंगे वो प्रत्येक नागरिक के पास होते हैं तो फिर डर कैसा!
                        एक अफवाह है कि पूर्वजों के जन्म प्रमाण पत्र मांगे जाएंगे, अरे 2000 ई.से पहले पैदा हुए लोगों के पास तो अपना ही जन्म प्रमाण पत्र नहीं  है तो पूर्वजों का कहाँ से दिखाएंगे! ऐसा कुछ भी नहीं मांगा जाएगा, यदि गलती से भी ऐसा हुआ तो हम भी आन्दोलन करेंगे! सरकार किसी को परेशान नहीं कर सकती वो तो सिर्फ अपने देश की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध है!
                         -डॉ सीमा सिंह 

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