हमारे देश में बलात्कार के अपराध तो रोज होते हैं, लेकिन अपराधियों को सजा नहीं मिलती! यदि मिलती भी है तो कानून की जटिल प्रक्रिया उन अपराधियों को सालों साल बचाती रहती है! किसी के मन में किसी भी प्रकार का कोई भय नहीं दिखाई देता! भय तो सजा से ही आ सकता है और सजा किसी को मिलती नहीं!
हजारों - लाखों बलात्कार की घटनाओं में से दो चार घटनाएँ ऐसी होती हैं जो मीडिया में उछलती हैं, जिनसे देश जागता है,और पीड़ित के लिये न्याय मांगता है !ऐसा लगता है कि ये घटना आखिरी घटना होगी इसके बाद दुबारा कभी किसी लड़की का बलात्कार नहीं होगा! ऐसी ही एक घटना दिसंबर 2012 में देश की राजधानी दिल्ली में घटित हुई थी जिसमें क्रूरता और जंगलीपन की सभी हदें पार हो गईं थी!
पूरा देश सड़कों पर आ गया था, निर्भया के लिये जल्द न्याय की गुहार लगा रहा था! आरोपी पकड़े गए, उन्हें मृत्युदण्ड की सज़ा भी सुनाई गई थी!
अब हम 2020 में जी रहे हैं लेकिन अभी भी उन बलात्कारियों को मृत्युदण्ड नहीं मिला है, वो जीवित हैं क्योंकि उनके वकील किसी न किसी कानूनी दाँवपेंच से उन्हें बचा लेते हैं और उनकी फांसी फिर टल जाती है! कोई पीड़िता या उसका परिवार कैसे करें कानून और न्याय पर भरोसा! इन चारों बलात्कारियों को देर सबेर फांसी मिल भी जाएगी लेकिन क्रूरतम अपराध को अंजाम देने वाला इन चारों बलात्कारियों का नाबालिग साथी तो जिन्दा घूम रहा है और घूमता रहेगा! वो तो 17 वर्ष का था, यदि वह 14 वर्ष का भी होता तब भी उसे फांसी की सजा का प्रावधान होना चाहिये था! जो इतना घिनौना अपराध कर सकता है उसे नाबालिग कहना भी शर्मनाक है!
क्या उसमें कोई सुधार हुआ होगा, यह कह पाना बहुत ही मुश्किल है! आपराधिक मानसिकता ऐसे नहीं जाती!
वो हमारे समाज के लिये अभी भी खतरा है! मैं मानवाधिकारों का समर्थन करती हूँ लेकिन बलात्कारियों के मानवाधिकारों के मामले में कुछ बदलाव की जरूरत है! ये बलात्कारी किसी लड़की की इज्जत को तार-तार तो करते ही हैं, साथ ही उसकी आत्मा को भी नोंच खाते हैं और आजकल तो तुरन्त हत्या भी कर डालते हैं!इनके मानवाधिकारों की बात करने वाला बलात्कार पीड़ित लड़की व उसके परिवार के मानवाधिकार क्यों भूल जाता है.. !
निर्भया के बलात्कारियों की फांसी जिस तरह से टल रही है, उससे तो यही लगता है कि हैदराबाद में 2019 में लेडी वेटेरिनरी डॉक्टर के गैंगरेप व हत्या के दोषियों का एनकाउंटर किया जाना बिल्कुल सही था! हमारी कानून व्यवस्था एनकाउंटर करने वाले पुलिस अधिकारियों को तो आड़े हाथ ले लेगी लेकिन दोषियों को बचने के हजार मौके देती रहेगी! इस कानून व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता है!
-डॉ सीमा सिंह
हजारों - लाखों बलात्कार की घटनाओं में से दो चार घटनाएँ ऐसी होती हैं जो मीडिया में उछलती हैं, जिनसे देश जागता है,और पीड़ित के लिये न्याय मांगता है !ऐसा लगता है कि ये घटना आखिरी घटना होगी इसके बाद दुबारा कभी किसी लड़की का बलात्कार नहीं होगा! ऐसी ही एक घटना दिसंबर 2012 में देश की राजधानी दिल्ली में घटित हुई थी जिसमें क्रूरता और जंगलीपन की सभी हदें पार हो गईं थी!
पूरा देश सड़कों पर आ गया था, निर्भया के लिये जल्द न्याय की गुहार लगा रहा था! आरोपी पकड़े गए, उन्हें मृत्युदण्ड की सज़ा भी सुनाई गई थी!
अब हम 2020 में जी रहे हैं लेकिन अभी भी उन बलात्कारियों को मृत्युदण्ड नहीं मिला है, वो जीवित हैं क्योंकि उनके वकील किसी न किसी कानूनी दाँवपेंच से उन्हें बचा लेते हैं और उनकी फांसी फिर टल जाती है! कोई पीड़िता या उसका परिवार कैसे करें कानून और न्याय पर भरोसा! इन चारों बलात्कारियों को देर सबेर फांसी मिल भी जाएगी लेकिन क्रूरतम अपराध को अंजाम देने वाला इन चारों बलात्कारियों का नाबालिग साथी तो जिन्दा घूम रहा है और घूमता रहेगा! वो तो 17 वर्ष का था, यदि वह 14 वर्ष का भी होता तब भी उसे फांसी की सजा का प्रावधान होना चाहिये था! जो इतना घिनौना अपराध कर सकता है उसे नाबालिग कहना भी शर्मनाक है!
क्या उसमें कोई सुधार हुआ होगा, यह कह पाना बहुत ही मुश्किल है! आपराधिक मानसिकता ऐसे नहीं जाती!
वो हमारे समाज के लिये अभी भी खतरा है! मैं मानवाधिकारों का समर्थन करती हूँ लेकिन बलात्कारियों के मानवाधिकारों के मामले में कुछ बदलाव की जरूरत है! ये बलात्कारी किसी लड़की की इज्जत को तार-तार तो करते ही हैं, साथ ही उसकी आत्मा को भी नोंच खाते हैं और आजकल तो तुरन्त हत्या भी कर डालते हैं!इनके मानवाधिकारों की बात करने वाला बलात्कार पीड़ित लड़की व उसके परिवार के मानवाधिकार क्यों भूल जाता है.. !
निर्भया के बलात्कारियों की फांसी जिस तरह से टल रही है, उससे तो यही लगता है कि हैदराबाद में 2019 में लेडी वेटेरिनरी डॉक्टर के गैंगरेप व हत्या के दोषियों का एनकाउंटर किया जाना बिल्कुल सही था! हमारी कानून व्यवस्था एनकाउंटर करने वाले पुलिस अधिकारियों को तो आड़े हाथ ले लेगी लेकिन दोषियों को बचने के हजार मौके देती रहेगी! इस कानून व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता है!
-डॉ सीमा सिंह
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